जानिए शेयर मार्किट में सबसे ज्यादा अर्निंग किसको होती है

सभी ने सॉवरिन वेल्थ फंड्स का नाम सुना होगा, ये दुनिया के रूलिंग क्लास के पोषित निवेशकों का समूह है। इनका उभरना हमेशा विवादित रहा है क्योंकि सबका मानना है की इनके इन्वेस्ट वित्तीय तौर से नहीं बल्कि राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित होते है। 
दुनिया के फ़ाइनेंशियल मार्किट का नेतृत्व तय करने वाले प्रमुख "चार" समूह है। 
सॉवरिन वेल्थ फंड्स के 4 समूह है, ये चारों दुनिया के शेयर बाज़ारों में सबसे महत्वपूर्ण व विख्यात है क्योंकि ये किसी भी समय कैसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानते। इन्हे "पावर ब्रोकर्स" के नाम से भी जाना जाता है। 
 
* Emkinsey ग्लोबल इंस्टिट्यूट के अनुसार चार पावर ब्रोकर्स है :-
 
1. पेट्रो डॉलर निवेशक (Petro Dollar Investors)
2. एशियन सेंट्रल बैंक  (Asian Central Bank)
3. निजी इक्विटी निवेशक (Private Equity Investors)
4. हेज़ फण्ड्स। (Hez funds)
 
ये पूँजी निवेश के अलावा आपस में एक-दूसरे में पार निवेश(Cross Investment) करते है। सॉवरिन वेल्थ फंड्स का कार्य पूर्णतया जालीदार रहित होने की वजह से इनके राजनीतिक प्रभाव से इंकार नहीं किया जा सकता है, इन चारों में से पेट्रो डॉलर निवेशक जो तेल निर्यातक देश है का निवेश सबसे अपारदर्शी तथा सबसे विवादित है। 
 
उद्धारण के तौर पर समझे तो सऊदी अरब की तेल कम्पनी अरमाको की गति विधि बहुत संदिग्ध है। यह कंपनी अपने से संबंधित किसी जानकारी को नहीं बताती, नाही तेल रिज़र्व के बारे में, ना अपने कमाई का ज़रिया। परन्तु इन्होंने पिछले वर्ष अपनी शुद्ध लाभ 111 अरब अमेरिकी डॉलर के बारे में घोषणा की थी। इस कम्पनी के प्रधान क्राउन प्रिंस सलमान है, जिनकी लॉबी अमेरिका में बहुत ही विख्यात है। ये सऊदी राज शाही के खिलाफ दुनिया में कही भी उठने वाली आवाज़ को अपने सीक्रेट और बर्बर विंग की सहायता की मदद से हमेशा के लिए चुप करा देते है।
 
विवरण के अनुसार इस शक्तिशाली समूह में दाखिल सेंट्रल बैंक्स(Central Banks) विदेशी परिसम्पति में काफी ज़्यादा निवेश करते है। जो की उनकी सम्पत्ति को स्थिरता प्रदान करता है, यहाँ इनका मकसद ढृढ़ता होता है फायदा कामना नहीं। इसके उपयोग से यह अपनी सम्पति के विख्यात भंडार को नक़दी तथा दीर्घकालिक सरकारी तारीख़ में रखते है। 
बचे तीन पावर ब्रोकर्स अपने धन का विशाल हिस्सा विदेशों में रखते है। ये स्विट्ज़रलैंड और लंदन के दलालों की सहायता से सरकारी कंट्रोलर तथा फण्ड से चलने वाली कंपनी के साथ निजी कम्पनी जो विदेशों में निवेश के लिए आय अभिलाषित करती है के अंदर अपनी सम्पति जमा करती है। 
 2012 में एक संकलन के अनुसार पावर ब्रोकर्स के अंतर्गत परिसम्पतियों की लागत 15200 अरब अमेरिकी थी। 
 एक परिकल्पना के अनुरूप सभी तेल निर्यातकों के पेट्रो डॉलर निवेश में 59 फीसदी सरकारों का तथा 41 फीसदी निजी समूहों से निवेश आता है। 
पावर ब्रोकर्स से संबंधित सभी जानकारी किसी अन्य को नहीं पता हो पाती है, ये स्वयं का पूरा व्यवसाय दुनिया के चयनित ज़्यादा शक्तिशाली व्यक्ति के द्वारा करते है। 
इनकी रणनीति समझ से परे है, यह कोई भी वस्तु विश्व के किसी भी स्टॉक मार्किट में आकस्मिक उतार-चढ़ाव को लाकर कुछ वक़्त में काफी फायदा कमाने और निकल जाने के लिए जाना जाता है। 
सभी आंकड़े mckinsey और वित्तीय समय की छान बिन समूह के द्वारा आंके हुए है जो बहुत साल के बाजार भुगतान से निकाले गए है। 



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